रात को मैंने मेरी सोई हुई आंटी की कामुकता जगाई

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मेरे अंकल कुछ दिनों के लिए परदेस गए थे. इन दिनों में आंटी घर में अकेली रहने वाली थी. इतने बड़े घर में अकेले रहने की उनकी आदत नहीं थी तो उन्होंने मुझे घर बुला लिया. रात को वह मुझे अपने पास ही सुलाती. साड़ी पहनी मेरी आंटी जब करवट पर सोती थी तब उनका बड़ा पिछवाड़ा देख मेरे पेंट में हलचल होने लगती थी. सारी रात मैं आंटी को निहारते रहता था.

एक दिन ढाढस बांधकर मैं उनसे चिपककर करवट पर लेट गया. उनका पिछवाड़ा मेरे प्राइवेट पार्ट्स को छू रहा था. मैंने उनके जिस्म पर हल्के हल्के हाथ फेरना शुरू कर दिया. इधर नीचे पैरों से मैं उनकी साड़ी ऊपर उठाने लगा.

इस कामुक स्पर्श से आंटी नींद में ही उत्तेजित होने लगी. वह मुझे रिस्पांस देने लगी. इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई. वो अब पीठ के बल सीधी लेटी हुई थी. मैंने उनके कंधे पर से पल्लू हटाया. उनका ब्लाउज भरमार उरोजों से फुल गया था. मैं उनपर हाथ फेरने लगा. जब उनकी सिसकारियां तेज हुई तब मैंने डर के कारण हाथ पीछे ले लिया. लेकिन आंटी ने मेरा हाथ पकड़कर फिर से अपने वक्ष स्थलों पर रख दिया. आखिरकार मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया.