पहाड़ कहीं भी चढ़ सकते हो लेकिन खाई में कूदने के लिए सही जगह चाहिए

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संभोग के लिए उत्सुक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को गांव के बाहर घास फूस वाले मैदान पर बुलाया था. वहां वह दोनों जमीन पर बैठकर प्रणय क्रीड़ा कर रहे हैं. लेकिन जब प्रेमी प्रेमिका के सलवार का नाडा छोड़ने लगता है तो प्रेमिका बोलती है, “पहाड़ चढ़ने की आजादी है लेकिन खाई में कूदने के लिए सही जगह का इंतजार करना पड़ेगा.” मतलब प्रेमी उसकी चूची तो कहीं भी दबा सकता है लेकिन चूत चोदने के लिए कमरा चाहिए.

पर प्रेमी उसकी एक नहीं सुन रहा. उसका टुनटुना तो फन फना रहा है. वह कहता है, “चलो उस पेड़ के पीछे अपना लोटा खाली करते हैं.”

प्रेमिका : नहीं.. कहा ना नहीं.

प्रेमी : थोड़ा तो खेलने दो.

प्रेमिका : नहीं मतलब नहीं.

प्रेमी : अच्छा हमको एक बार चुम्मा तो लेने दो नीचे.

प्रेमिका : ठीक हैं, लेकिन एक्खे बार.

प्रेमिका से इजाजत पाते ही प्रेमी उसकी गुलाबी सलवार नीचे खिसकाता है. प्रेमिका ने अंदर काली चड्डी पहनी हुई है. लेकिन जैसे ही प्रेमी उसकी जांघों को छूता है, लड़की सहम सी जाती है. वो उठ खड़ी होती है और वहां से निकलने लगती है. प्रेमी उसे रात को मिलने के लिए कहता है तो वह असमझ में मान जाती है.